जिंदगी
जिंदगी से आज मुलकात हुई,
कुछ खामोश सी थी
लेकींन बहुत कुछ बोलना
चाहती थी। ।
वो वक्त और हालात के बारे में
कुछ बोलना चाहती थी
बताने को उसने शुरु किया
कुछ इस तरह......
जिंदगी जीने का मजा बचपन मे ही था
क्योकीं तब कहाँ जिम्मेदारियोका बोझ सर पे था ।।
माँ बाप के साये मे जीना, ही जीना था
आज खुद कमाये, फिर भी कुछ अधुरापन सा था ।।
पापा ने जिंदगी का, हर पाठ पढाया था
वही पाठ अब खाली, जेब ने सिखाया था ।।
जिंदगीके बहुत रंगो से,अभी रुबरु होना था
मंजिल की तरफ निकले है, तो मुलाकात होना भी तय था ।।
इस सफर मे सफल होंगे , की असफल पता नही था
लेकिन जो भी होगा अच्छा ही होगा ,
क्योकीं
जिंदगी ने अभी तक, बहुत कुछ सिखाया था ।।
जीने का हुनर जिंदगी खुद सीखा देती है ।
- प्रशांत महाजन
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